विजयदशमी
आज निशा में
अग्नि चूमेगी आकाश को
लपटें उठेंगी प्रचण्ड हो..
कोई रावण , कोई राम
प्रकृति के इस चक्र में
बौना ही जान पड़ेगा!
रश्मियां चमकेगी यों
की होगा ऊर्जा का संचार;
किंतु जिनमें ऊर्जा का उत्साह,
उन्मत्तता की ओर झुक जायेगा...
उनसे वह “प्रकृति” का बोध छूट जायेगा।
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