प्रेम

 हे शक्ति मुझे दो देवत्व;

कि आकर्षणों में डूबे हुये प्रेमियों को 

मिल जाये उन्हें अपना देवता और 

हो उन्हें दर्शन मुझसे! प्रत्यक्ष प्रेम का।


या मुझे दो ऐसी विद्वता;

कि ये जिस आकर्षण को

प्रेम का नाम दिये हुये हैं,

जान ले वह है केवल कल्पना मात्र,

और खुल जाये इनके नेत्र । 


या मुझे दो नया पाखंड; 

कि जो प्रेम की परिभाषा चली आई है..

उसी परिभाषा की अग्नि में 

घी डालकर अग्नि और प्रज्वलित कर 

अगली पीढ़ी को भी इसमें झोंक लूं।



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